रंगा हुआ सियार (moral story)
रंगा हुआ सियार बहुत पुरानी बात है किसी जंगल में एक धूर्त सियार जिसका नाम सूपडु सियार था ,रहता था एक दिन वह खाने की खोज में भटकते – भटकते गलती से शहर चला गया । जैसे ही वे गली में घुसा बहुत सारे कुत्ते उसके पीछे पड़ गए और वह अपनी जान बचाता हुआ इधर उधर भागने लगा ,भागते हुए वह रंगरेजों की गली में पहुँच गया । वहाँ बहुत सारे टब रखे हुए थे । जिनमें अलग अलग रंग घुला हुआ पानी रखा हुआ था। कैसे खुली नगाडे की पोल - पढे एक मोरल कहानी बच्चों के लिए जल्दबाजी व घबराहट में वह सियार जाकर एक टब में गिर गया । उस टब में रंगरेज ने नीला रंग पानी में घोल कर रखा था । और जब वह पानी में से जब सुपडु सियार उस टब में से निकल तो वह पूरा का पूरा नीले रंग का हो गया । अब वह उदास तथा मायूस होकर वापस जंगल की ओर चल दिया । जब वह जंगल पहुंचा तो उसको किसी ने नहीं पहचाना बल्कि डरे डरे से उसे देखने लगे ।यहाँ तक कि शेर ,चीता , बाघ भी उससे डर गए । सियार समझ गया कि इन्होंने मुझे नहीं पहचाना । वो धूर्त था उसे तुरंत एक तरकीब सूझी । उसने जानवरों से कहा कि -तुम लोग डरो मत मैं तुमको ...